1.कोंग्का ला पास UFO बेस कोंग्का ला भारत एवं चीन के मध्य , विवादित अक्साई चान प्रदेश में स्थित एक निचली पहाड़ी चोटी के बीच का रास्ता है । हि...
1.कोंग्का ला पास UFO बेस
कोंग्का ला भारत एवं चीन के मध्य , विवादित अक्साई चान प्रदेश में स्थित एक निचली पहाड़ी चोटी के बीच का रास्ता है । हिमालय में अपनी स्थिति एवं सीमा विवाद के कारण यह विश्व का सबसे कम भ्रमण वाला क्षेत्र है । दोनों देशों के नागरिकों , सन्यासियों , सैनिकों एवं माउंट कैलाश के तीर्थयात्रियों आदि ने यहां अजूबे यान देखने की बात कही है । कुछ लोगों के मुताबिक इस जगह पर जमीन के अन्दर UFO का बेस है , जिसके बारे में चीनी एवं भारतीय अधिकारियों को पता है । इस क्षेत्र में किसी वैज्ञानिक के जाने की मनाही है । विवादित होने के कारण दोनों में से किसी भी देश ने इस क्षेत्र का अधिक अध्ययन नहीं किया है ।
2.जटिंगा में चिड़ियों की आत्महत्या
जटिंगा , दीमा हसिंगा , असम में स्थित एक छोटा सा गांव , चिड़ियों की खुदखुशी के लिए प्रसिद्ध है । वैज्ञानिकों को इस घटना में काफी रूचि है , जो हर साल सितम्बर व नवम्बर माह में मानसून के वक्त शाम 7 से 10 बजे के बीच घटित होती है । इस समय ऐसा लगता है मानो पक्षियों ने जिंदगी से हार सी मान ली हो । यह घटना दूर के प्रवासी पक्षियों पर कोई प्रभाव नहीं डालती , अपितु यहां रहने वाले पक्षी इस घटना से प्रभावित होते हैं । सूर्यास्त के समय कई पक्षी 115 किमी लम्बी पट्टी पर पेड़ों एवं खाली इमारतों से टकरा कर मर जाते हैं या अपने आप को चोट पहुचाते हैं । इनके इस व्यवहार का कोई उचित कारण पता नहीं लगा सका है ।
3.कुलधारा ( राजस्थान ) अभिशप्त गाँव
कुलधारा भुतिया वीरान गाँव के रूप में कुख्यात है जो सन 1800 से ही वीरान पडा है | इसके पीछे एक श्राप बताया जाता है जो कभी भी ख़त्म नहीं होगा | कहा जाता है की यहाँ पर रहने वाले लोग एक ही रात में गायब हो गये थे जिसके बाद यह कभी नहीं बसा यह गाँव जो अब खंडहरों में तब्दील हो चूका है , 1291 में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया था , जो बहुत ही समृद्ध जाती थी और अपने व्यापार और खेती के लिए प्रसिद्ध भी | कहा जाता है की 1825 की एक रात में कुलधारा के सभी लोग और 83 के करीब गाँव अचानक ही बिना किसी कारण अचानक ही गायब हो गये | एक कहानी के अनुसार एक मंत्री कुलधारा की एक लड़की से शादी करना चाहता था | गांववालों ने इसके लिए मना कर दिया तो मंत्री ने इन पर दुगुना टैक्स लगा दिया | इसके बाद गांववाले कुलधारा को छोड़ कर कही और चले गये और जाते जाते इस जमीन को कभी न बसने का श्राप दे गए | कहते है की जो भी इस जमीन पर बसने की कोशिश करता है मर जाता है |
4.केरल की लाल बारिश
जुलाई 25 से सितंबर 23 , 2001 के बीच कुछ ऐसी बारिश हुई थी जिसका रंग लाल रंग जैसा था । ऐसी ही बारिश १ ९ ८६ में भी देखी गयी थी और तब से ऐसी बारिश बहुत बार हो चुकी है । २००६ में इस बारिश के विषय में कुछ शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष की कोशिका के रूप में माना था क्यों कि माइक्रोस्कोप में ये जैविक कोशिका जैसा दिखता था जिससे पानी का रंग लाल हो गया था । इसकी उत्पत्ति किसी उल्का विस्फोट से भी हो सकता है । एक और सिद्धांत के मुताबिक इस लाल बारिश का कारण शैवाल भी हो सकती है जो उस इलाक़े के पेड़ों में बहुतायत पाया जाता है । पेड़ों में पाया जाने वाला शैवाल इतनी मात्रा में कैसे वाष्पीकृत हो सकता है कि उससे लाल रंग की बारिश हो सके । कुल मिला कर इस लाल बारिश का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका है ।
5.दिल्ली का लौह स्तम्भ
लौह स्तंभ दिल्ली में कुतुब मीनार के निकट स्थित एक विशाल स्तम्भ है । यह अपनेआप में प्राचीन भारतीय धातुकर्म की पराकाष्ठा है । यह कथित रूप से राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ( राज ३७५ - ४१३ ) से निर्माण कराया गया , किंतु कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पहले निर्माण किया गया , संभवतः ९ १२ ईपू में । स्तंभ की उँचाई लगभग सात मीटर है और पहले हिंदू व जैन मंदिर का एक हिस्सा था । तेरहवीं सदी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने मंदिर को नष्ट करके कुतुब मीनार की स्थापना की । लौह - स्तम्भ में लोहे की मात्रा करीब ९ ८ % है । सामान्यतः , कोई भी लोहे की वस्तु समय के साथ जंग पकड़ लेती है लेकिन यह एक अनसुलझा रहस्य है कि इतने प्राचीन लौह के इस स्तम्भ पर जंग बिल्कुल भी नहीं है । पुरातत्व के जानकार और वैज्ञानोकों ने इसपर कितने ही प्रयोग किये लेकिन इस प्राचीन धरोहर के धातुकर्म का सही निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाये हैं । बताया जाता है इसको तीस किलो लोहे को गलाकर बनाया गया है लेकिन ऐसा एक भी स्थान नहीं है जिसमे कोई जोड़ने या एक थोड़ा भी अंतर दिखे । आश्चर्य है कि ईसा के 900 वर्ष पहले भारत का धातुकर्म इतना विकसिक था । शायद भारत में हर एक विषय पर शोध नहीं किये जाने से कितने ही तकनिकी मिट्टी में दफन हो गए । कुछ तो हमारी भूल है जो हम इन तकनीक का संचय नहीं कर सके या फिर उन सबको विदेशी आक्रमणों ने समाप्त कर दिया । जो भी है यह धरोहर एक आइना है जो आपसे पूछती है कितना पहचानते हैं हिंदुस्तान को ? सच , इस 68 वर्षीय जिस हिंदुस्तान को आप जानते हैं उससे सैकड़ों गुना बड़ा है और इसपर बहुत नाज़ हैं हमें । है ना ?
6.लटकती हुई लाश
कूपर फैमिली ने 1950 के आसपास टेक्सास में एक पुराना घर खरीदा । उस घर में पहली रात जश्न मनाने के दौरान उनके पिता ने परिवार की फोटो ली । इस फोटो में दो बच्चे अपनी मां और दादी की गोद में बैठे हुए हैं । इस फोटो के डेवलप होने के बाद पूरा परिवार ही आतंकित हो गया , क्योंकि फोटो में परिवार के साथ ही एक लटकती हुई लाश भी दिखाई दे रही थी । दावा किया गया कि फोटो लेने के वक्त वहां ऐसी कोई भी चीज मौजूद नहीं थी । कुछ लोगों ने कहा कि संभव है कि निगेटिव के साथ छेड़छाड़ की गई हो , लेकिन कूपर फैमिली ने इससे इंकार किया । बाद में फोटो की सच्चाई जानने की कई लोगों ने कोशिश की , लेकिन यह अब भी रहस्य बनी हुई है ।
7.लोच झील का दैत्य
माना जाता है कि स्कॉटलैंड की लोच झील ' के दैत्य का रहस्य झील में ही छुपा हुआ है । यह रहस्य 1933 में पहली बार तब सामने आया , जब लोगों ने झील में एक दैत्याकार जीव को देखा था । हालांकि , कुछ रिपोर्टों में इसे डायनासोर प्रजाति का एक विलुप्त जीव ' प्लेसेसौर ' माना जाता रहा है , जो गहरे पानी में रहता है और कम ही सतह पर आता है ।
8.दिल्ली - जयपुर हाइवे
भानगढ़ का डरावना किला आपको याद होगा , बता दें य इसी रास्ते पर है । दिल्ली - जयपुर हाईवे पर रात के वक्त डरावने किस्से अक्सर सुनने मिलते हैं । यहां से गुज़रने वाले ड्राइवरों का कहना है कि वे बता नहीं सकते कि उन्होंने असल में क्या अनुभव किया खासकर तब जब वे भानगढ़ किले के आसपास होते हैं ।
9.आसमानी बिजली का रहस्य
1638 को सेंट पेंक्रास के एक चर्च को एक जोरदार आंधा का सामना करना पड़ा । इस दौरान चर्च से एक आसमानी बिजली टकराई थी । दोपहर का समय होने के कारण चर्च प्रार्थना करते 300 लोगों से खचाखच भरा हुआ था । चार लोग इसमें मारे गए , 60 बुरी तरह घायल हुए और बिल्डिंग भी तहस - नहस हो गई । इस घटना के पहले अजीब अंधेरा छा गया था । तेज रोशनी चर्च और उसमें बैठे लोगों को नुकसान पहुंचाकर वापस चली गई । therichest Icom के मुताबिक , स्थानीय लोगों ने दावा किया था कि एक शैतान ने जुआरियों के बुलाने पर इस घटना को अंजाम दिया था । असल में क्या हुआ था , इसे लेकर आज भी अटकलें ही लगाई जा रही हैं । कई रिसर्चरों ने इस घटना के तह में जाने की कोशिश की , लेकिन उन्हें भी कुछ हाथ नहीं लगा ।
10.जोधपुर का ध्वनि गर्जन
आपको दिसम्बर 2012 तो याद ही होगा , जब पूरा विश्व य मान बैठा था की यह धरती का अंत है । इसी समय संसार में कई जगहों पर भीषण ध्वनि गर्जना सुनी गयी । ऐसा ही एक अनुभव 18 दिसम्बर 2012 को जोधपुर में भी किया गया । यह ध्वनि गर्जन इतना तीव्र था कि लोग इसे सुन अपने घरों से निकल गए । लोगों ने सोचा कि शायद सैनिक छावनी में कोई विस्फोट हुआ । लेकिन थल एवं वायु सेना दोनों ने इस बात से इंकार कर दिया । इस गगनभेदी गर्जन का रहस्य अब तक नहीं सुलझा है ।









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