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गढ़ पहरा का किला जहा भटक टी है नट नटनी की आत्मा ।

यहां के लोगों का दावा है कि तब से लेकर आज तक नट - नाटन की आत्मा किले और महल के आस - पास घूमती रहती है । नट और नटिन से जुड़ी कहानी के मुताबिक...

यहां के लोगों का दावा है कि तब से लेकर आज तक नट - नाटन की आत्मा किले और महल के आस - पास घूमती रहती है । नट और नटिन से जुड़ी कहानी के मुताबिक किसी जमाने में यहां एक बूढ़े राजा का शासन था । बुंदेलखंड में पड़ने वाला ‘ गढ़ पहरा ' उसकी राजधानी थी । उस दौरान राज्य में एक नट और नटिनी के खतरनाक करतबों और रस्सी पर चलने के दौरान उनके संतुलन की खूब चर्चाएं होती थी ।


गढ़ पहरा का किला जहा भटक टी है नट नटनी की आत्मा ।


 बूढ़े राजा की इच्छा के मुताबिक मंत्रियों ने नटों को राज दरबार पहुंचने का संदेशा भेजा । नट अपनी पत्नी के साथ राजा के दरबार पहुंचा । कहते हैं कि नट की पत्नी बहुत खूबसूरत थी । दरबार में राजा ने नट से कहा - राज्य में तुम्हारे करतबों की काफी तारीफ़ हो रही है । मैं भी तुम्हारा एक हैरतअंगेज करतब देखना चाहता हूं । अगर सच में तुमने ऐसा करतब करके दिखाया तो पुरस्कार के रूप में आधा राज्य दे दिया जाएगा । 


बूढ़े राजा ने नट को जो करतब दिखाने के लिए कहा था , वह बहुत खतरनाक था । दरअसल , इस करतब में किले के ऊंचे परकोटे से लेकर दूसरी ओर पहाड़ों में एक रस्सी बांधी जानी थी । बीच रास्ते में गहरी और खतरनाक खाई थी । इस रस्सी पर चलकर नटिन को उस पार पहुंचना था ।


गढ़ पहरा का किला जहा भटक टी है नट नटनी की आत्मा ।


राजा की इस इच्छा पर नट और नटिन असमंजस में पड़ गए । पहले उन्होंने कभी इतना खतरनाक करतब नहीं किया था । इसे करने में उनकी जान भी जा सकती थी और अगर वे इनकार करते तो बूढ़ा राजा उनसे नाराज हो सकता था । वे राजा को भी नाराज नहीं करना चाहते थे । लिहाजा नटों ने करतब के लिए अपनी हामी दे दी । तुरंत ही राजा के आदेश पर करतब की तैयारी शुरू हो गई ।


उस रात नट ठीक से सो नहीं पाए । ये रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित हुई । उन्होंने पूरी रात जागकर गाते हुए बिताई । उनकी आवाज बूढ़े राजा के महल तक पहुंच रही थी । कहते हैं कि गीत के बोल कुछ ' गई रात और पहर थोड़े ... ' थी । किवदंती के मुताबिक़ बूढ़े राजा का बेटा , उस रात अपने पिता की ह्त्या करना चाह रहा था । उसे राज्य की सत्ता का लालच था ।


यह भी कहते हैं कि उसी रात शादी नहीं होने से परेशान राजा की बेटी भी महल छोड़कर भागना चाहती थी , जबकि उसी रात राजा की पत्नी भी इस बात से दुखी थी कि करतब दिखाकर नट - नटिन उनका आधा राज्य ले लेंगे । नटिन के गाने को सुनकर राजा के बेटे ने अपना मन बदल लिया । उसने सोचा , अब बूढ़ा पिता कितने दिन जीवित रहेगा ? जबकि , बेटी ने भी यह सोचकर अपना मन बदल लिया कि जैसे - इतना दिन बीत गया है , वैसे ही कुछ और दिन गुजर जाएंगे ।


सुबह तय वक्त पर इस खतरनाक खेल को देखने के लिए हजारों की संख्या में राज्य की जनता उमड़ पड़ी । महल के परकोटे से दूसरे छोर तक ऊंचाई पर बंधी रस्सी देखकर ही लोगों को भय लगा था । राजा अपने महल की छत पर राज परिवार के साथ करतब देखने के लिए बैठा था । नट ने नगाड़े की थाप दी और रस्सी पर चलकर खाई पार करने का खतरनाक खेल शुरू हो गया ।


नटिन बांस की डंडी के सहारे रस्सी पर चलने लगी । कथा के मुताबिक रस्सी पर गजब का संतुलन दिखाते हुए नटिन कुछ ही देर में आधे रास्ते तक पहुंच गई थी । उसके ऐसा करते ही रानी की चिंताएं बढ़ने लगी । नटिन पर राजा की आसक्ति देखकर रानी को लगा कि आधा राज तो जाएगा ही , कहीं राजा नटिन से विवाह भी न कर ले । तभी रानी ने एक खतरनाक फैसला लिया । जिस रस्सी पर नटिन चल रही थी , रानी ने उसे कटवा दिया । नीचे चट्टानों पर गिरने से नटिन की मौत हो गई । जबकि नटिन के वियोग में नट ने भी नगाड़े पर थाप देते - देते अपनी जान दे दी ।


कहते हैं कि नट - नटिन की मौत के कुछ ही दिन बाद बूढ़े राजा का पूरा राज्य तहस - नहस हो गया । सागर में किले से सटे हाईवे पर रात के दौरान कई वाहन चालकों ने एक महिला को टहलते हुए देखने का दावा किया है । लोग मानते हैं कि ये उसी नटिन की आत्मा है , जिसकी जान रानी के धोखे में चली गई थी । कुछ लोगों ने किले के पास रात में दर्द भरे गीत भी सुनने का दावा किया है । वैसे , यहां प्रचलित दंतकथाओं में भी कहा जाता है कि नट - नटिन रात के दौरान रोज वही दुखभरा गीत गाते हैं , जो उन्होंने करतब से पहले रात में गाया था ।

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गढ़ पहरा का किला जहा भटक टी है नट नटनी की आत्मा ।
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